Home National Korba (CG) – अलविदा डायबिटिज स्वास्थ्य ​शि​विर ​- डॉ श्रीमंत भाई के...

Korba (CG) – अलविदा डायबिटिज स्वास्थ्य ​शि​विर ​- डॉ श्रीमंत भाई के द्वारा

84
0

कोरबाः प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईष्वरीय विष्व विद्यालय के अंतर्राश्ट्र्ीय मुख्यालय आबूपर्वत के ग्लोबल हास्पिटल से प्रतिश्ठित मधुमेह चिकित्सक ब्रह्माकुमार ​​डॉ श्रीमंत कुमार साहू के मुख्य सानिध्य में स्वास्थ्य ​ ​शि​विर -अलविदा डायबिटिज के कार्यक्रम का ​ शु​भारम्भ भ्राता जयसिंह अग्रवाल विधायक कोरबा, बहन रेणु अग्रवाल महापौर नगर निगम कोरबा, भ्राता एम.एस.क्रंवर कार्यपालक निदेषक उत्पादन, डी.एस.पी.एम कोरबा, भ्राता डॉ. अविनाष तिवारी अध्यक्ष आल इण्डिया मेडिकल एसोसिएसन कोरबा, बहन उमा बंसल समाज सेवी आदि गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में फुटवाल मैदान सी.एस.ई.बी चौक में किया गया।

भ्राता जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि कोरबा में अधिकांष बीमारियां वातावरण प्रदूशण के कारण है। ब्रह्माकुमारी संस्थान के द्वारा समय समय पर अनेकानेक जन जाग्रति के कार्यक्रम आयोजित होते रहते हैं जो कि कोरबा वासियों के लिये बहुत ही उपयोगी होते हैं। भ्राता एम.एस.कं्रवर ने कहा कि स्वास्थ्य जीवन का एक बहुत ही महत्वपूर्ण पहलू है। आजकल मधुमेह, रक्तचाप, हार्ट अटैक एवं कैन्सर जैसी बीमारियों का प्रकोप बढ़ता ही जा रहा हैं, जो कि मृत्यु का प्रमुख कारण बन रही है। कोरबा में भी डायबिटिज से प्रभावित लोगों की संख्या कम नहीं है। आज का यह कार्यक्रम सभी के लिये लाभदायक होगा।

डॉ श्रीमंत कुमार साहू ने कहा कि मधुमेह एक ​खामोश जानलेवा बीमारी है और यह एक बार होने से अंतिम ​ तक पीछा नहीं छोड़ती है। मधुमेह एक ऐसी बीमारी है, जिसमें हमारे रक्त में ​शुगर मात्रा अधिक होने के कारण मूत्र से भी निश्काशित होने लगती है। हमारे पेट में पैनक्रियास अग्नाष्य नाम की एक ग्रंथी से इन्सुलिन नामक एक हारमोन का स्राव जब कम हो जाता है या यह इन्सुलिन षरीर में ठीक रीति से काम नहीं करती है, तब इस बीमारी की षुरूआत होती है। रक्त में लम्बे समय तक षुगर की मात्रा अधिक पाए जाने से इसका कुप्रभाव षरीर के सभी अंगों पर होने लगता है। जिससे 75 ​प्रतिशत से ज्यादा मरीज हृदयघात के षिकार हो जाते हैं। कईयों के गुर्दे खराब हो जाते हैं तो फिर कई अंधे हो जाते हैं। कईयों की टांगे काटनी पड़ती हैं। तनाव और रक्तचाप तथा रक्त ​शर्करा का गहरा नाता है। मधुमेह, हाईपरटेन्षन आदि बीमारी से बचने के लिये तनावमुक्त रहना जरूरी है। नित्य राजयोग के अभ्यास, नियमित व्यायाम और खान-पान की नियमितता से इस जान लेवा बीमारी को पूर्ण रूप से नियंत्रित कर सकते हैं।

ब्रह्माकुमारी रूकमणी बहन ने कहा कि मधुमेह असंतुलित जीवन ​शैली की पैदाईस है। जीवन में हर घटना को स्वीकार करें और इसका हल सकारात्क रूप से खोजें तो मन षांत, खुषनुमः और तन स्वस्थ रहेगा। बहुत समय के प्रयास के बाद आज यह कार्यक्रम आयोजित हुआ है। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में, मैं सभी सहयोगी संस्थान एवं नगरवासियों का सहृदय धन्यवाद देना चाहूंगी।

Click here to read more